कहौ दान कबही भयौ, कहत न आवत लाज।
यह बन राधा कुँवरि कौ, इक-छत राजत-राज॥
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, दान लीला (06)
श्री ललिता जी श्री कृष्ण से कहती हैं— यह तो बताइये कि इस नित्य वृन्दावन में दान का विधान पहले कब हुआ? आपको यह कहते लज्जा नहीं आती? ध्यान रखिए! यह श्री वृन्दावन श्री राधाजू का निज-वन है, यहाँ कुँवरि किशोरी का ही एकछत्र साम्राज्य है, तब आपके द्वारा दान माँगने का क्या तुक है?
यह बन राधा कुँवरि कौ, इक-छत राजत-राज॥
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, दान लीला (06)
श्री ललिता जी श्री कृष्ण से कहती हैं— यह तो बताइये कि इस नित्य वृन्दावन में दान का विधान पहले कब हुआ? आपको यह कहते लज्जा नहीं आती? ध्यान रखिए! यह श्री वृन्दावन श्री राधाजू का निज-वन है, यहाँ कुँवरि किशोरी का ही एकछत्र साम्राज्य है, तब आपके द्वारा दान माँगने का क्या तुक है?

