देखहु अद्भुत प्रेम की - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री प्रेम मंजरी (03)

देखहु अद्भुत प्रेम की - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री प्रेम मंजरी (03)

देखहु अद्भुत प्रेम की, यह गति कहौं लखीन।
सब जग जिहिं आधीन है, सो याकै आधीन॥

- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री प्रेम मंजरी (03)

श्री राधा के इस अद्भुत प्रेम की गति को देखो, जो वर्णनातीत है। सम्पूर्ण जग भगवान श्री कृष्ण के अधीन है, परंतु वे स्वयं श्री राधा के अधीन हैं।