गोस्वामि हरिवंश जू बचन कह्यौ पद माँहि - श्री किशोरी अलि

गोस्वामि हरिवंश जू बचन कह्यौ पद माँहि - श्री किशोरी अलि

गोस्वामि हरिवंश जू, बचन कह्यौ पद माँहि।
या रज के सेये बिना, अनत कहूँ सुख नाहि॥

- श्री किशोरी अलि

गोस्वामी श्री हित हरिवंश जी ने भी अपने एक पद में उद्घोष किया है कि जब तक जीव श्री वृन्दावन की दिव्य रज का सेवन (आश्रय) नहीं करता, तब तक उसे दिव्य और शाश्वत सुख की प्राप्ति संभव नहीं है।