जागत में सुमिरन करै, सोवत में लौ लाय।
सहजो इकरस ही रहै, तार टूटि नहिं जाय॥
- श्री सहजो बाई
जागृत अवस्था में निरंतर प्रभु का स्मरण बना रहे और निद्रा के समय भी उन्हीं की लौ (चिंतन) लगी रहे। सहजो बाई जी कहती हैं कि इस प्रकार भक्ति सदैव बनी रहनी चाहिए, एक क्षण को भी खंडित नहीं होनी चाहिए अर्थात् वह प्रेम का तार कभी किसी परिस्थिति में टूटना नहीं चाहिए।
सहजो इकरस ही रहै, तार टूटि नहिं जाय॥
- श्री सहजो बाई
जागृत अवस्था में निरंतर प्रभु का स्मरण बना रहे और निद्रा के समय भी उन्हीं की लौ (चिंतन) लगी रहे। सहजो बाई जी कहती हैं कि इस प्रकार भक्ति सदैव बनी रहनी चाहिए, एक क्षण को भी खंडित नहीं होनी चाहिए अर्थात् वह प्रेम का तार कभी किसी परिस्थिति में टूटना नहीं चाहिए।

