हम अहीरि कह जानईं, जोग जुगुति की रीति।
नंदनंदन ब्रत छाँड़ि कै, को लिखि पूजै भीति॥
- श्री सूरदास, सूर सागर (4713.15)
जब उद्धव योग की युक्ति-विधि की चर्चा करते हैं, तब ब्रज की गोपियाँ उत्तर देती हैं— हम तो सीधी-सादी ग्वालिनें हैं, हम योग साधने की क्रिया कैसे समझेंगी? तुम ही बताओ श्री कृष्ण के निष्काम प्रेम के एकमात्र व्रत को छोड़ कर कौन दीवार पर बने चित्र या अंकित चिह्न/अक्षर आदि की पूजा करेगा?
नंदनंदन ब्रत छाँड़ि कै, को लिखि पूजै भीति॥
- श्री सूरदास, सूर सागर (4713.15)
जब उद्धव योग की युक्ति-विधि की चर्चा करते हैं, तब ब्रज की गोपियाँ उत्तर देती हैं— हम तो सीधी-सादी ग्वालिनें हैं, हम योग साधने की क्रिया कैसे समझेंगी? तुम ही बताओ श्री कृष्ण के निष्काम प्रेम के एकमात्र व्रत को छोड़ कर कौन दीवार पर बने चित्र या अंकित चिह्न/अक्षर आदि की पूजा करेगा?

