(राग-बिलावल)
हमारे प्यारे श्यामाश्याम बिराजे।
रतन जड़ित सिंघासन ऊपर, शोभा निधि छबि छाजे॥ [1]
गौर स्याम सुन्दर मन भावन, पट भूषन तन साजे।
हँसि हेरन चित चोर रसीले, बने अनूपम आजे॥ [2]
निज जन जीवन प्रान अधारे, निरखि काम रति लाजे।
'नूपीबाई' दासि चरण की, गावत सहित समाजे॥ [3]
- श्री नूपीबाई (शुक संप्रदाय की भक्त)
रत्नजड़ित सिंहासन पर, समस्त सौंदर्य की निधि, हमारे प्यारे श्री श्यामा-श्याम आज सुशोभित हैं। [1]
गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्रीकृष्ण मन को अत्यंत प्रिय लगते हैं, और उनके श्रीअंगों पर सुंदर वस्त्र और आभूषण सज रहे हैं। उनकी रसीली हँसी और चितवन मन को सहजता से चुरा लेने वाली है। आज वे अनुपम रूप में सजे हुए हैं। [2]
वे अपने भक्तों के जीवन और प्राणों के आधार हैं, जिनकी सुंदरता को देखकर साक्षात् कामदेव और रति भी लज्जित हो जाते हैं। चरणदासी श्री नूपीबाई भक्तों के समाज (संग) में श्री श्यामा-श्याम की महिमा का गान कर रही हैं। [3]
हमारे प्यारे श्यामाश्याम बिराजे।
रतन जड़ित सिंघासन ऊपर, शोभा निधि छबि छाजे॥ [1]
गौर स्याम सुन्दर मन भावन, पट भूषन तन साजे।
हँसि हेरन चित चोर रसीले, बने अनूपम आजे॥ [2]
निज जन जीवन प्रान अधारे, निरखि काम रति लाजे।
'नूपीबाई' दासि चरण की, गावत सहित समाजे॥ [3]
- श्री नूपीबाई (शुक संप्रदाय की भक्त)
रत्नजड़ित सिंहासन पर, समस्त सौंदर्य की निधि, हमारे प्यारे श्री श्यामा-श्याम आज सुशोभित हैं। [1]
गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्रीकृष्ण मन को अत्यंत प्रिय लगते हैं, और उनके श्रीअंगों पर सुंदर वस्त्र और आभूषण सज रहे हैं। उनकी रसीली हँसी और चितवन मन को सहजता से चुरा लेने वाली है। आज वे अनुपम रूप में सजे हुए हैं। [2]
वे अपने भक्तों के जीवन और प्राणों के आधार हैं, जिनकी सुंदरता को देखकर साक्षात् कामदेव और रति भी लज्जित हो जाते हैं। चरणदासी श्री नूपीबाई भक्तों के समाज (संग) में श्री श्यामा-श्याम की महिमा का गान कर रही हैं। [3]

