हमरी बात भली बनी भई लडैती प्रान - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (279)

हमरी बात भली बनी भई लडैती प्रान - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (279)

हमरी बात भली बनी, भई लडैती प्रान।
ताही तें अति सुख भयो, मिली सु रसिक सुजान॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (279)

जगत में हमारी बात बहुत ही सुन्दर बन गई क्योंकि स्वयं सर्वोपरि श्रीनित्यविहारिनीजू (श्री राधा) हमारी प्राण-स्वरूप हो गई हैं। रसिक-शिरोमणि श्यामा प्यारी जू के मिलने से हमें अति ही सुख प्राप्त हो गया है।