नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास

नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास

नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द।
प्रेमसिधु मर्याद तजि, मिले उमॅगि आनन्द॥

- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास

नवल निकुंजों में नवीन-नागरी (श्री राधा) और नूतन-नागर नंदनन्दन (श्री कृष्ण) विराजमान हैं। आज प्रेम का सागर अपनी मर्यादाओं को त्यागकर उमड़ पड़ा है, जहाँ ये दोनों आनंद के साथ परस्पर मिल रहे हैं।