मूका जडांधबधिरास्तपोनियमवर्जिताः।
कालेनैव मृता ये च मम लोकं व्रजंति ते॥
- स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्डः (2), मार्गशीर्ष महात्म्य (5), अध्यायः (17), छंद (49)
जो मनुष्य चाहे गूंगे, मूर्ख, अंधे, बहरे हों अथवा तप तथा नियमों से रहित हों— वे भी यदि ब्रज में मृत्यु को प्राप्त होते हैं, तो मेरे दिव्य लोक को प्राप्त होते हैं।
कालेनैव मृता ये च मम लोकं व्रजंति ते॥
- स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्डः (2), मार्गशीर्ष महात्म्य (5), अध्यायः (17), छंद (49)
जो मनुष्य चाहे गूंगे, मूर्ख, अंधे, बहरे हों अथवा तप तथा नियमों से रहित हों— वे भी यदि ब्रज में मृत्यु को प्राप्त होते हैं, तो मेरे दिव्य लोक को प्राप्त होते हैं।

