(सवैया)
श्रीवृषभानकिशोरी सुजान, सुनौं विनती सुधि लेउ हमारी। [1]
आपनी जानि कृपा करिकें, हँसि हेरि कहौ सखि आउ हमारी॥ [2]
नाम कहूँ गुन गाइ रहूँ, पद-कंज बिना गति है न हमारी। [3]
पास रहै परमानंद श्रीहित, राधिका जीवन प्रान हमारी॥ [4]
- श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, श्री राधाष्टक (01)
हे नवल-नागरी श्री वृषभानु किशोरी (श्री राधा)! मेरी विनती सुनिए और मुझ दीन की सुधि लीजिए। [1]
मुझे अपनी दासी जानकर मुझ पर ऐसी कृपा कीजिए कि आप मुस्कुराकर मेरी ओर देखें और कहें— "हे सखी! यहाँ हमारे पास आओ।" [2]
मैं निरंतर आपका नाम पुकारता रहूँ और आपके गुणों का गान करता रहूँ, क्योंकि आपके चरण-कमलों के बिना मेरा और कोई सहारा नहीं है। [3]
श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं कि मेरी यही अभिलाषा है कि मैं सदा आपके पास रहकर आपकी निष्काम सेवा करती रहूँ क्योंकि हे श्री राधिका जू! आप ही हमारे जीवन का प्राण-सर्वस्व हैं। [4]
श्रीवृषभानकिशोरी सुजान, सुनौं विनती सुधि लेउ हमारी। [1]
आपनी जानि कृपा करिकें, हँसि हेरि कहौ सखि आउ हमारी॥ [2]
नाम कहूँ गुन गाइ रहूँ, पद-कंज बिना गति है न हमारी। [3]
पास रहै परमानंद श्रीहित, राधिका जीवन प्रान हमारी॥ [4]
- श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, श्री राधाष्टक (01)
हे नवल-नागरी श्री वृषभानु किशोरी (श्री राधा)! मेरी विनती सुनिए और मुझ दीन की सुधि लीजिए। [1]
मुझे अपनी दासी जानकर मुझ पर ऐसी कृपा कीजिए कि आप मुस्कुराकर मेरी ओर देखें और कहें— "हे सखी! यहाँ हमारे पास आओ।" [2]
मैं निरंतर आपका नाम पुकारता रहूँ और आपके गुणों का गान करता रहूँ, क्योंकि आपके चरण-कमलों के बिना मेरा और कोई सहारा नहीं है। [3]
श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं कि मेरी यही अभिलाषा है कि मैं सदा आपके पास रहकर आपकी निष्काम सेवा करती रहूँ क्योंकि हे श्री राधिका जू! आप ही हमारे जीवन का प्राण-सर्वस्व हैं। [4]

