नारायण दुख सुख उभै - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (101)

नारायण दुख सुख उभै - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (101)

नारायण दुख सुख उभै, भ्रमत यथा दिन रात।
बिन बुलाय ज्यों आ रहैं, बिना कहे त्यों जात॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (101)

सुख और दुख जीवन में दिन और रात के चक्र की भाँति बिना बुलाए आते-जाते रहते हैं। इसलिए विवेकी मनुष्य को इन दोनों ही परिस्थितियों में समभाव बनाए रखना चाहिए और विचलित हुए बिना धैर्यपूर्वक अपने मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।