प्यारे को नचवत प्रिया, कबहुँ लकुट लै त्रासि।
जैसे सिखवत लाड़िली, नाचत तैसहिं लाल॥
- श्री रामसखीजी महाराज, श्री भक्तिरस मंजरी, दोहा (93)
प्रिया जी (श्री राधा) अपने प्रियतम श्री कृष्ण को नाचना सिखा रही हैं, और कभी-कभी वे अपने हाथ में लकुटी (छड़ी) लेकर उन्हें तनिक डराती भी हैं। जैसे-जैसे लाड़िली जी उन्हें नचाती हैं, श्री कृष्ण उनके अधीन होकर बिल्कुल वैसे-वैसे ही नाचते हैं।
जैसे सिखवत लाड़िली, नाचत तैसहिं लाल॥
- श्री रामसखीजी महाराज, श्री भक्तिरस मंजरी, दोहा (93)
प्रिया जी (श्री राधा) अपने प्रियतम श्री कृष्ण को नाचना सिखा रही हैं, और कभी-कभी वे अपने हाथ में लकुटी (छड़ी) लेकर उन्हें तनिक डराती भी हैं। जैसे-जैसे लाड़िली जी उन्हें नचाती हैं, श्री कृष्ण उनके अधीन होकर बिल्कुल वैसे-वैसे ही नाचते हैं।

