(राग जैजैवंती)
कालीदह कूल कुंजके माहीं, भ्रमरी है दुमडारि रहौं।
कीर कोकिला ह्वै निधुवन में, मधुरे राधानाम कहौं॥ [1]
गुल्म लता गहिवर की ह्वैकै, वृंदावन को वास चहौं ।
ललितकिशोरी रेणु कीजिये, जुगुलचरण उर आंक रहौं॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (28)
मेरी यही अभिलाषा है कि मैं कालीदह के तट पर स्थित कुंजों में एक भ्रमरी बनकर वृक्षों की डालियों पर निवास करूँ अथवा निधिवन का तोता या कोयल बन जाऊँ और मधुर स्वर में निरंतर 'राधा' नाम का ही गान करूँ। [1]
मैं श्री वृन्दावन के गह्वर वन की झाड़ी या लता बनकर सदा इसी वृन्दावन की पावन भूमि में वास करना चाहता हूँ। श्री ललितकिशोरी प्रार्थना करते हैं कि हे युगल सरकार! मुझे अपने चरणों की रज बना लीजिये, जिससे मैं श्री युगल-चरणों को सदा अपने ऊपर धारण कर सकूँ। [2]
कालीदह कूल कुंजके माहीं, भ्रमरी है दुमडारि रहौं।
कीर कोकिला ह्वै निधुवन में, मधुरे राधानाम कहौं॥ [1]
गुल्म लता गहिवर की ह्वैकै, वृंदावन को वास चहौं ।
ललितकिशोरी रेणु कीजिये, जुगुलचरण उर आंक रहौं॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (28)
मेरी यही अभिलाषा है कि मैं कालीदह के तट पर स्थित कुंजों में एक भ्रमरी बनकर वृक्षों की डालियों पर निवास करूँ अथवा निधिवन का तोता या कोयल बन जाऊँ और मधुर स्वर में निरंतर 'राधा' नाम का ही गान करूँ। [1]
मैं श्री वृन्दावन के गह्वर वन की झाड़ी या लता बनकर सदा इसी वृन्दावन की पावन भूमि में वास करना चाहता हूँ। श्री ललितकिशोरी प्रार्थना करते हैं कि हे युगल सरकार! मुझे अपने चरणों की रज बना लीजिये, जिससे मैं श्री युगल-चरणों को सदा अपने ऊपर धारण कर सकूँ। [2]

