खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार - श्री हरिराम व्यास,  व्यास वाणी, साखी (34)

खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (34)

खरौ-खरौ सब लेत हैं, परखि पारखू सार।
खोटे ‘व्यास’ अनन्य कौ, गाहक नंदकुमार॥

- श्री हरिराम व्यास,  व्यास वाणी, साखी (34)

सांसारिक लोग किसी पारखी की भाँति केवल लाभप्रद वस्तु का ही चयन करते हैं अर्थात् अपने स्वार्थ सिद्धि के अनुसार ही सम्बन्ध जोड़ते हैं। किन्तु नन्दलाल श्रीकृष्ण एक विलक्षण गाहक हैं, जो मुझ जैसे सर्वगुणहीन और दोषपूर्ण जीव को भी निष्काम भाव से अपना लेते हैं। अतः एक अनन्य भक्त के लिए श्री कृष्ण ही एकमात्र सच्चे और परम कृपालु आश्रय हैं।