मृगनैनी आमोदनी, महामोद की रास।
गिरि बन पुलिन बिलासिनी, मोमन करहु निवास॥
- ब्रज के दोहे
हे मृग के समान चपल और सुंदर नेत्रों वाली, आनंद प्रदान करने वाली, साक्षात् महा-आनंद की पुंज, श्री राधा महारानी! हे गोवर्धन, वृंदावन के वनों और यमुना के तटों पर विलास (क्रीड़ा) करने वाली स्वामिनी! आप कृपा करके मेरे मन में सदैव निवास करें।
गिरि बन पुलिन बिलासिनी, मोमन करहु निवास॥
- ब्रज के दोहे
हे मृग के समान चपल और सुंदर नेत्रों वाली, आनंद प्रदान करने वाली, साक्षात् महा-आनंद की पुंज, श्री राधा महारानी! हे गोवर्धन, वृंदावन के वनों और यमुना के तटों पर विलास (क्रीड़ा) करने वाली स्वामिनी! आप कृपा करके मेरे मन में सदैव निवास करें।

