चितवत चित करषत जिते - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (54)

चितवत चित करषत जिते - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (54)

चितवत चित करषत जिते, चित समाधि महँ लाय।
औरन की का बात कह, शिव गोपी तनु पाय॥

- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (54)

श्री कृष्ण की एक रसमयी दृष्टि से बड़े-बड़े परमहंस समाधि भुला देते हैं और परमहंसों की तो गणना ही क्या, जब स्वयं देवाधिदेव भगवान् शिव ने भी उस रस के आस्वादन हेतु गोपी-देह को धारण कर लिया।