हम तौ राधाकृष्न-उपासी - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (11)

हम तौ राधाकृष्न-उपासी - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (11)

(राग खमाच)
हम तौ राधाकृष्न-उपासी।
गौर-स्याम अभिराम मनोहर, सुंदर छबि सुख-रासी॥ [1]
एक प्रान तन मन दोऊ नित, वृंदा-बिपिन-बिलासी।
कृपा-दृष्टि तैं पाई "ब्रजनिधि", दंपति खास खवासी॥ [2]

- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (11)

हम तो केवल श्री राधा-कृष्ण के ही उपासक हैं। गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्री कृष्ण की यह जोड़ी अत्यंत अभिराम, मनमोहक और सुख की राशि है। [1]

यद्यपि इनके शरीर और मन दो दिखाई देते हैं, किंतु वास्तव में ये दोनों नित्य एक ही प्राण हैं, जो सदा श्री वृन्दावन के वनों में विलास करते हैं। श्री ब्रजनिधि कहते हैं कि श्री प्रिया-प्रियतम की कृपा दृष्टि से ही मुझे इस दिव्य दंपति की निज सेवा और सान्निध्य प्राप्त हुआ है। [2]