धन धन वृन्दावन गोपेश्वर बाबा।
वंशीवट में बैठक कीनी, कुतवाली कौ दावा॥ [1]
जो कोऊ सेवा करै पहुँच के, बाके विघन मिटावा।
‘अभयराम’ वह भोरो भोला, गहरी रिद्धि बढ़ावा॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (07)
श्री वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव धन्य, धन्य हैं। उन्होंने वंशीवट पर अपनी बैठक बनाई है और वे वृन्दावन के कोतवाल (रक्षक) होने का अधिकार रखते हैं। [1]
जो कोई भी भाव से वहाँ पहुँचकर उनकी सेवा करता है, बाबा उसके समस्त विघ्नों का नाश कर देते हैं। श्री अभयराम कहते हैं कि वे परम भोलेनाथ बड़े ही सरल स्वभाव के हैं और अपने शरणागत को समस्त प्रकार की संपन्नता प्रदान करते हैं। [2]
वंशीवट में बैठक कीनी, कुतवाली कौ दावा॥ [1]
जो कोऊ सेवा करै पहुँच के, बाके विघन मिटावा।
‘अभयराम’ वह भोरो भोला, गहरी रिद्धि बढ़ावा॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (07)
श्री वृन्दावन के गोपेश्वर महादेव धन्य, धन्य हैं। उन्होंने वंशीवट पर अपनी बैठक बनाई है और वे वृन्दावन के कोतवाल (रक्षक) होने का अधिकार रखते हैं। [1]
जो कोई भी भाव से वहाँ पहुँचकर उनकी सेवा करता है, बाबा उसके समस्त विघ्नों का नाश कर देते हैं। श्री अभयराम कहते हैं कि वे परम भोलेनाथ बड़े ही सरल स्वभाव के हैं और अपने शरणागत को समस्त प्रकार की संपन्नता प्रदान करते हैं। [2]

