श्री राधा रस मोहिनी - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (6)

श्री राधा रस मोहिनी - श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (6)

श्री राधा रस मोहिनी, मोहे मोहनलाल।
पीवत तृप्ति न होत हैं, ‘प्रिया सखी’ प्रतिपाल॥

- श्री प्रिया सखी (श्री ब्रह्म गोपाल गोस्वामी), श्री हरि लीला (6)

श्री राधा महारानी जू साक्षात् रस मोहिनी हैं अर्थात् जिन्होंने अपने रस से सबको मोहने वाले मोहनलाल (श्री कृष्ण) को भी मोहित कर लिया है। श्री कृष्ण उनके इस अद्भुत रस का निरंतर पान करते रहते हैं, फिर भी वे कभी तृप्त नहीं होते। श्री प्रिया सखी कहती हैं कि वे अपनी अकारण करुणा से रसिकों एवं श्री कृष्ण को सदा रस प्रदान कर पोषण करती रहती हैं।