तन वन सरस सुहावनों तरु बेली फल फूल - श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (28)

तन वन सरस सुहावनों तरु बेली फल फूल - श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (28)

तन वन सरस सुहावनों, तरु बेली फल फूल।
दंपति नित्य बिहार कल, करत दोऊ समतूल॥

- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (28)

वृक्षों, लताओं, फलों और पुष्पों से सदा सरस एवं मनोहर बने हुए श्रीधाम वृंदावन में श्यामा-कुंजबिहारी (प्रिया-प्रियतम), दोनों परस्पर समरस भाव से एवं नित्य-किशोर स्वरूप में सदा नित्य विहार करते रहते हैं।