भजन भजन सव कोऊ कहै - श्री नेह नागरीदास जी की वाणी, दोहावली (29)

भजन भजन सव कोऊ कहै - श्री नेह नागरीदास जी की वाणी, दोहावली (29)

भजन भजन सव कोऊ कहै, मारग लगनौ दूर।
इन्द्री तन गुन भजन के, जव मिल वैगौ चूर ॥

- श्री नेह नागरीदास, श्री नेह नागरीदास जी की वाणी, दोहावली (29)

कहने को तो सभी मुख से भजन और भक्ति की बातें करते हैं, लेकिन वास्तव में भक्ति मार्ग पर चलना बहुत कठिन होता है। जब इन्द्रियाँ, शरीर और सांसारिक गुण पूरी तरह टूटकर भक्ति में विलीन हो जाते हैं, तभी सच्चा भजन होता है।