(राग भैरवी व बरबा)
श्रीराधा पद पंकज रज सरबस धन मेरी ।
मैंतो मन बचन करम श्यामा की चेरी ॥ [1]
अहो प्रिय प्राण जीवन आशा मोहिं तेरी ।
देहु दर्श दयानिधे क्यों करी अवेरी ॥ [2]
सेवा श्री अंगन की दीजिये सवेरी ।
राखो मोहिं शरण सदा चरणन के नेरी ॥ [3]
बैयां मम गहो आय करो नाहिं देरी ।
सरस रूप माधुरी को लग रहि अवसेरी ॥ [4]
- श्री सरस माधुरी
श्री राधा जी के चरण कमलों की परम-पावन रज ही मेरा सर्वस्व धन है। मैं मन, वचन और कर्म से केवल अपनी श्री श्यामा महारानी की ही अनन्य दासी हूँ। [1]
हे मेरी प्रिय प्राण-जीवन धन स्वामिनी! मुझे केवल आपका ही एकमात्र भरोसा और आशा है। हे दया की अगाध निधि! अब मुझे अपने दर्शन प्रदान कीजिए, आपने आने में इतनी देर क्यों कर दी है? [2]
मुझे अपने सुकुमार श्री अंगों की सेवा अति-शीघ्र ही प्रदान कीजिए और मुझे सदा-सदा के लिए अपने चरणों के निकट अपनी पावन शरण में रख लीजिए। [3]
हे श्यामा जू! अब आकर मेरी बाँह थाम लीजिए और तनिक भी विलंब न कीजिए। सरस माधुरी कहते हैं कि आपके इस परम रसभरे रूप-माधुरी के दर्शनों की तीव्र अभिलाषा मेरे हृदय में निरंतर लगी हुई है। [4]
श्रीराधा पद पंकज रज सरबस धन मेरी ।
मैंतो मन बचन करम श्यामा की चेरी ॥ [1]
अहो प्रिय प्राण जीवन आशा मोहिं तेरी ।
देहु दर्श दयानिधे क्यों करी अवेरी ॥ [2]
सेवा श्री अंगन की दीजिये सवेरी ।
राखो मोहिं शरण सदा चरणन के नेरी ॥ [3]
बैयां मम गहो आय करो नाहिं देरी ।
सरस रूप माधुरी को लग रहि अवसेरी ॥ [4]
- श्री सरस माधुरी
श्री राधा जी के चरण कमलों की परम-पावन रज ही मेरा सर्वस्व धन है। मैं मन, वचन और कर्म से केवल अपनी श्री श्यामा महारानी की ही अनन्य दासी हूँ। [1]
हे मेरी प्रिय प्राण-जीवन धन स्वामिनी! मुझे केवल आपका ही एकमात्र भरोसा और आशा है। हे दया की अगाध निधि! अब मुझे अपने दर्शन प्रदान कीजिए, आपने आने में इतनी देर क्यों कर दी है? [2]
मुझे अपने सुकुमार श्री अंगों की सेवा अति-शीघ्र ही प्रदान कीजिए और मुझे सदा-सदा के लिए अपने चरणों के निकट अपनी पावन शरण में रख लीजिए। [3]
हे श्यामा जू! अब आकर मेरी बाँह थाम लीजिए और तनिक भी विलंब न कीजिए। सरस माधुरी कहते हैं कि आपके इस परम रसभरे रूप-माधुरी के दर्शनों की तीव्र अभिलाषा मेरे हृदय में निरंतर लगी हुई है। [4]

