सेवाकुंज सो कुँज निज सम्पति दम्पति सेव - श्री चरणदास

सेवाकुंज सो कुँज निज सम्पति दम्पति सेव - श्री चरणदास

सेवाकुंज सो कुँज निज, सम्पति दम्पति सेव।
सुख तत्सुख उज्ज्वल सरस, अच्युत गोत्र अभेव॥

- श्री चरणदास

यह सेवाकुंज ही हमारा परम निज-धाम कुंज है, जहाँ निरंतर श्री प्रिया-प्रियतम की सेवा करना ही हमारा परम लक्ष्य है। यह सेवा ‘तत्सुख-सुख’ के भाव से की जाती है—अर्थात् प्रिया-प्रियतम के सुख में ही अपना सुख मानना है। यही भाव अत्यंत उज्ज्वल और सर्वदा सरस है। हमारा गोत्र ‘अच्युत’ है—अर्थात् हमारा सर्वस्व श्रीकृष्ण से ही सम्बन्धित है।