(राग खम्माच चौताला)
वृन्दावनधाम नीको व्रजको विश्राम नीको।
श्यामाश्याम नाम नीको मन्दिर आनंदको॥ [1]
कालीदह न्हान नीको रेनुकाको खान नीको।
जमुना पै पान नीको स्वाद मानों कंदको॥ [2]
राधाकृष्ण कुंड नीको संतनको संग नीको।
गौरश्याम रंग नीको अंग जुगचंद को॥ [3]
नील पीत पट नीको वंशीवट तट नीको।
ललितकिशोरी नीकी नटनी को नंद को॥ [4]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (85)
श्री वृन्दावन धाम अत्यंत सुंदर है, ब्रज मंडल का परम विश्राम सुखद है। श्यामा श्याम का नाम परम सुंदर एवं कल्याणकारी है और उनका यह धाम आनंद का साक्षात मंदिर है। [1]
कालीदह का पावन स्नान अत्यंत सुखद है और यहाँ की दिव्य चरण-रज तो मानो रस की अनमोल खान है। श्री यमुना जी के शीतल जल का आचमन परम मधुर है, जिसका स्वाद मिश्री या कंद मूल के समान रसीला लगता है। [2]
श्री राधाकुंड और श्री कृष्णकुंड अत्यंत पावन एवं सुंदर हैं, और यहां रहने वाले संतों का सत्संग परम सुखदाई है। प्रिया-प्रियतम का गौर एवं साँवल रंग अत्यंत मनमोहक है, और युगल-सरकार के अंग ऐसे सुशोभित होते हैं मानो दो चंद्रमा एक साथ उदित हो गए हों। [3]
श्री राधा का नीलाम्बर एवं श्री कृष्ण का पीताम्बर अत्यंत सुंदर है और वंशीवट का पावन तट परम सुहावना है। श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि ऐसे परम नटवर लाल श्री कृष्ण एवं उनके प्राणों से प्यारी नवल-किशोरी श्री राधा की यह युगल जोड़ी सर्वोपरि और अत्यंत सुंदर है। [4]
वृन्दावनधाम नीको व्रजको विश्राम नीको।
श्यामाश्याम नाम नीको मन्दिर आनंदको॥ [1]
कालीदह न्हान नीको रेनुकाको खान नीको।
जमुना पै पान नीको स्वाद मानों कंदको॥ [2]
राधाकृष्ण कुंड नीको संतनको संग नीको।
गौरश्याम रंग नीको अंग जुगचंद को॥ [3]
नील पीत पट नीको वंशीवट तट नीको।
ललितकिशोरी नीकी नटनी को नंद को॥ [4]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (85)
श्री वृन्दावन धाम अत्यंत सुंदर है, ब्रज मंडल का परम विश्राम सुखद है। श्यामा श्याम का नाम परम सुंदर एवं कल्याणकारी है और उनका यह धाम आनंद का साक्षात मंदिर है। [1]
कालीदह का पावन स्नान अत्यंत सुखद है और यहाँ की दिव्य चरण-रज तो मानो रस की अनमोल खान है। श्री यमुना जी के शीतल जल का आचमन परम मधुर है, जिसका स्वाद मिश्री या कंद मूल के समान रसीला लगता है। [2]
श्री राधाकुंड और श्री कृष्णकुंड अत्यंत पावन एवं सुंदर हैं, और यहां रहने वाले संतों का सत्संग परम सुखदाई है। प्रिया-प्रियतम का गौर एवं साँवल रंग अत्यंत मनमोहक है, और युगल-सरकार के अंग ऐसे सुशोभित होते हैं मानो दो चंद्रमा एक साथ उदित हो गए हों। [3]
श्री राधा का नीलाम्बर एवं श्री कृष्ण का पीताम्बर अत्यंत सुंदर है और वंशीवट का पावन तट परम सुहावना है। श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि ऐसे परम नटवर लाल श्री कृष्ण एवं उनके प्राणों से प्यारी नवल-किशोरी श्री राधा की यह युगल जोड़ी सर्वोपरि और अत्यंत सुंदर है। [4]

