कौन कहै को सुनें, लाल कछुवै नहिं जानत ।
एक राधिका विना जगत, सूनो करि मानत॥
- श्री मनोहर दास, रसिक कर्णाभरण (163)
कौन कहे और कौन सुने, लालजी (श्री कृष्ण) को श्री राधा के अतिरिक्त कुछ भी सुध-बुध नहीं है। वे अपनी प्राणप्रिया, एकमात्र स्वामिनी श्री राधिका जू के अभाव में इस समस्त संसार को सर्वथा शून्य और सारहीन अनुभव करते हैं।
एक राधिका विना जगत, सूनो करि मानत॥
- श्री मनोहर दास, रसिक कर्णाभरण (163)
कौन कहे और कौन सुने, लालजी (श्री कृष्ण) को श्री राधा के अतिरिक्त कुछ भी सुध-बुध नहीं है। वे अपनी प्राणप्रिया, एकमात्र स्वामिनी श्री राधिका जू के अभाव में इस समस्त संसार को सर्वथा शून्य और सारहीन अनुभव करते हैं।

