कानन मो गति कानन मो पति - श्री वृंदावन दास जी

कानन मो गति कानन मो पति - श्री वृंदावन दास जी

(सवैया)
कानन मो गति, कानन मो पति, कानन जननी, जनक सु भैया।
कानन निर्भय वास करौं नित, यह मन होहि न अनत चलैया॥ [1]
कानन की संपति दृग-दरसौं, कानन ही सुख होहु दिवैया।
वृन्दावन हित रूप राधिका, प्यारी-पद-रति सुविधि करैया॥ [2]

- श्री वृंदावन दास चाचा जी

यह दिव्य कानन (श्री वृन्दावन अथवा बरसाना धाम) ही मेरी एकमात्र गति (आश्रय) है, यही मेरा स्वामी (पति) है, और यही मेरी माता, पिता तथा भाई है। मैं इस पावन कानन में नित्य निर्भय होकर वास करूँ, और मेरा यह मन इस कानन को त्यागकर कभी भी किसी अन्य स्थान पर न भटके। [1]

मैं अपनी इन आँखों से निरंतर इस कानन की अलौकिक सौंदर्य-संपत्ति का ही दर्शन करूँ, और यह कानन ही मेरे जीवन में समस्त परम सुखों को प्रदान करने वाला है। श्री हित वृंदावन दास जी कहते हैं कि यह साक्षात् श्री राधिका जू ही हैं, अथवा अपनी अहैतुकी कृपा से हमें श्री राधा जू  के चरणों की अनन्य रति (प्रेम) भली-भांति प्रदान करने वाला है। [2]