अन्तरायान् रसास्वादे-दोषान् - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (4)

अन्तरायान् रसास्वादे-दोषान् - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (4)

अन्तरायान् रसास्वादे-दोषान् कामादिकानपि।
भक्तानां हन्ति कृपया-तेन राधा प्रकीर्तिता॥

- श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (4)

श्री राधा अपनी अहैतुकी कृपा से भक्तों के रसास्वादन (दिव्य प्रेम-रस) में आने वाली बाधाओं तथा काम, क्रोध आदि दोषों सहित समस्त पापों का समूल नाश कर देती हैं; इसलिए उन्हें “राधा” कहा जाता है।