रूप-सरोवर लाडिली, फूले सहज सरोज।
पानि, पाद, नाभी, नयन, आनन उदित उरोज॥
- श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (12)
हमारी लाडिलीजी (श्री राधा) साक्षात् रूप-सौंदर्य का अथाह सरोवर हैं, जिसमें उनके विभिन्न अंग — दो हस्तकमल, दो चरण कमल, एक नाभि कमल, दो नयन कमल, एक मुख कमल और उन्नत उरोज कमल — ये दस कमल, सदा सहज खिले रहते हैं।
पानि, पाद, नाभी, नयन, आनन उदित उरोज॥
- श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (12)
हमारी लाडिलीजी (श्री राधा) साक्षात् रूप-सौंदर्य का अथाह सरोवर हैं, जिसमें उनके विभिन्न अंग — दो हस्तकमल, दो चरण कमल, एक नाभि कमल, दो नयन कमल, एक मुख कमल और उन्नत उरोज कमल — ये दस कमल, सदा सहज खिले रहते हैं।

