“अली किशोरी मनहि लगाये, गरे लगावत प्यारी॥”
- श्री किशोरी अलि
श्री अलि किशोरी जी कहते हैं कि हमारी सामर्थ्य तो केवल इतनी ही है कि हम किसी प्रकार अपने इस चंचल मन को स्वामिनी श्री राधा प्यारी में लगाने का प्रयास करते हैं; परन्तु हमारी लाड़ली जू इतनी परम करुणामयी और वात्सल्यमयी हैं कि वे हमारे इस लघु प्रयास पर ही रीझकर, अत्यंत प्रेमपूर्वक हमें अपने श्रीकंठ (गले) से लगा लेती हैं।
- श्री किशोरी अलि
श्री अलि किशोरी जी कहते हैं कि हमारी सामर्थ्य तो केवल इतनी ही है कि हम किसी प्रकार अपने इस चंचल मन को स्वामिनी श्री राधा प्यारी में लगाने का प्रयास करते हैं; परन्तु हमारी लाड़ली जू इतनी परम करुणामयी और वात्सल्यमयी हैं कि वे हमारे इस लघु प्रयास पर ही रीझकर, अत्यंत प्रेमपूर्वक हमें अपने श्रीकंठ (गले) से लगा लेती हैं।

