(दोहा)
टरहु न टारी अहु निसा, अहु प्यारी सुनि बैंन।
मृदु मूरति यह रावरी, रहु मो उर करि ऐंन॥
(पद)
रहौ मेरे उर में ऐंन करि प्यारी यह मृदु मूरति तिहारी।
टरहु न टारी अहो निसा री वारी वारी वारी॥ [1]
जीय जियारी अति सुकुँवारी निमिष न होहु नियारी।
श्रीहरिप्रिया सहज सुखकारी सकल लोक उजियारी॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (69)
हे प्यारी जू, मेरी प्रार्थना पर विचार कीजिए - आपकी यह मृदुल एवं माधुर्यमयी मूर्ति की छटा रात-दिन मेरे हृदय में सदा बनी रहे और यह छवि मेरे ध्यान से टालने पर भी कभी न टले।
(पद)
हे किशोरी जी! आपकी यह सुकुमार मूरति मेरे हृदय में सदा वास करे । चाहे दिन हो या रात, केवल आपका रूप ही मेरे चित्त में बना रहे, यदि मैं उसे हटाना भी चाहूँ तो भी वो न हटे, आपकी इस मनमोहिनी छवि पर मैं बारम्बार बलिहारी जाता हूँ। [1]
आप मेरे प्राणों को जीवन देने वाली (प्राण-आधार) और अत्यंत सुकुमारी हैं, इसलिए पल भर के लिए भी आप मेरे हृदय से अलग न हों। श्री हरिप्रिया (श्री राधा) का यह रूप स्वाभाविक रूप से मंगलकारी है एवं समस्त लोकों को प्रकाशित करने वाला है। [2]
टरहु न टारी अहु निसा, अहु प्यारी सुनि बैंन।
मृदु मूरति यह रावरी, रहु मो उर करि ऐंन॥
(पद)
रहौ मेरे उर में ऐंन करि प्यारी यह मृदु मूरति तिहारी।
टरहु न टारी अहो निसा री वारी वारी वारी॥ [1]
जीय जियारी अति सुकुँवारी निमिष न होहु नियारी।
श्रीहरिप्रिया सहज सुखकारी सकल लोक उजियारी॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (69)
हे प्यारी जू, मेरी प्रार्थना पर विचार कीजिए - आपकी यह मृदुल एवं माधुर्यमयी मूर्ति की छटा रात-दिन मेरे हृदय में सदा बनी रहे और यह छवि मेरे ध्यान से टालने पर भी कभी न टले।
(पद)
हे किशोरी जी! आपकी यह सुकुमार मूरति मेरे हृदय में सदा वास करे । चाहे दिन हो या रात, केवल आपका रूप ही मेरे चित्त में बना रहे, यदि मैं उसे हटाना भी चाहूँ तो भी वो न हटे, आपकी इस मनमोहिनी छवि पर मैं बारम्बार बलिहारी जाता हूँ। [1]
आप मेरे प्राणों को जीवन देने वाली (प्राण-आधार) और अत्यंत सुकुमारी हैं, इसलिए पल भर के लिए भी आप मेरे हृदय से अलग न हों। श्री हरिप्रिया (श्री राधा) का यह रूप स्वाभाविक रूप से मंगलकारी है एवं समस्त लोकों को प्रकाशित करने वाला है। [2]

