साध कहावै आप कूँ चलै दुष्ट की चाल - श्री सहजो बाई

साध कहावै आप कूँ चलै दुष्ट की चाल - श्री सहजो बाई

साध कहावै आप कूँ, चलै दुष्ट की चाल।
बाद लिये फूला फिरै, बहुत बजावै गाल॥

- श्री सहजो बाई

जो मनुष्य संसार में स्वयं को साधु कहलाता है, किंतु उसका आचरण दुष्ट व्यक्तियों के समान होता है, जो निरर्थक वाद-विवाद और कुतर्क में उलझा रहता है, अहंकार से फूला फिरता है तथा बड़ी-बड़ी डींगें हाँकता रहता है, वह वास्तव में साधु नहीं, बल्कि कुतर्की है।