सदा सर्वदा जुगल एक एक जुगल तन धाम - ब्रज के दोहे

सदा सर्वदा जुगल एक एक जुगल तन धाम - ब्रज के दोहे

सदा सर्वदा जुगल एक, एक जुगल तन धाम।
आनंद अरु आह्लाद मिलि, विलसत है द्वै नाम॥

- ब्रज के दोहे

श्री प्रिया-प्रियतम तत्त्वतः सदा एक एवं अभिन्न हैं, तथापि अपने निजधाम श्रीवृन्दावन में वे युगल-रूप से विराजमान होकर नित्य लीला-विलास करते हैं। वहाँ आनंद स्वरूप श्रीकृष्ण और आह्लादिनी स्वरूपा श्रीराधा, एक ही तत्त्व के दो रूप एवं दो नाम धारण कर दिव्य रस-विहार में निमग्न रहते हैं।