(राग वागेश्री त्रिताल)
लाड़ो तुम ही हो मम भाग।
सेवाकुञ्ज तोहे खोजत डोलूं, कब बढ़ि है अनुराग॥ [1]
रसिक जननि को संग दीजियो, सव सुख साज समाज।
राधा राधा नाम रटूँगी, ये ही लगन रहे लाग॥ [2]
सुखी रहो प्रीतम संग राधे, नित ही खेलो फाग।
हितगोपाल की प्राणन प्यारी, नव-नव गावो राग॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (43)
हे लाड़ली (श्री राधा)! आप ही मेरा परम सौभाग्य हैं। मैं सेवाकुञ्ज में आपको खोजती हुई भटकती रहती हूँ, न जाने कब मेरे हृदय में आपके प्रति पूर्ण अनुराग जागृत होगा। [1]
मुझे रसिक जनों का संग प्रदान कीजिए जो समस्त प्रकार से सुखदायक है। मैं निरन्तर “राधा-राधा” नाम का जप करती रहूँ और मेरे हृदय में यही प्रेममयी लगन सदा बनी रहे। [2]
हे राधे! आप अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के साथ सदा सुखपूर्वक रहें और नित्य नवीन फाग खेलें अथवा प्रेम-विलास करती रहें। श्री हित गोपाल दास की प्राणप्यारी हे किशोरी जी! आप नित्य नवीन राग-रागिनियों का गान करती रहें। [3]
लाड़ो तुम ही हो मम भाग।
सेवाकुञ्ज तोहे खोजत डोलूं, कब बढ़ि है अनुराग॥ [1]
रसिक जननि को संग दीजियो, सव सुख साज समाज।
राधा राधा नाम रटूँगी, ये ही लगन रहे लाग॥ [2]
सुखी रहो प्रीतम संग राधे, नित ही खेलो फाग।
हितगोपाल की प्राणन प्यारी, नव-नव गावो राग॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (43)
हे लाड़ली (श्री राधा)! आप ही मेरा परम सौभाग्य हैं। मैं सेवाकुञ्ज में आपको खोजती हुई भटकती रहती हूँ, न जाने कब मेरे हृदय में आपके प्रति पूर्ण अनुराग जागृत होगा। [1]
मुझे रसिक जनों का संग प्रदान कीजिए जो समस्त प्रकार से सुखदायक है। मैं निरन्तर “राधा-राधा” नाम का जप करती रहूँ और मेरे हृदय में यही प्रेममयी लगन सदा बनी रहे। [2]
हे राधे! आप अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के साथ सदा सुखपूर्वक रहें और नित्य नवीन फाग खेलें अथवा प्रेम-विलास करती रहें। श्री हित गोपाल दास की प्राणप्यारी हे किशोरी जी! आप नित्य नवीन राग-रागिनियों का गान करती रहें। [3]

![लाड़ो तुम ही हो मम भाग - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (43)](https://images.brajrasik.org/6a20feed857e340004db21bb-m.jpeg)