सुख निधि श्री गिरिराज तरहटी - गोस्वामी श्री हरिराय जी

सुख निधि श्री गिरिराज तरहटी - गोस्वामी श्री हरिराय जी

(राग बिहाग)
सुख-निधि श्री गिरिराज तरहटी।
कुंड-कुंड जल अचवत न्हावत, पुनि-पुनि रज में लेटी॥ [1]
धरत भोग बेझर की रोटी, ऊपर सेवा टेंटी।
'रसिकदास' जन श्री बल्लभ पद, परम सकल दुख मेंटी॥ [2]

- गोस्वामी श्री हरिराय जी

श्री गिरिराज जी की तलहटी समस्त सुखों की निधि (खजाना) है, जहाँ के विभिन्न कुंडों के जल का आचमन करके और उसमें स्नान करके, भक्त बार-बार व्रज-रज में लोटकर आनन्द का अनुभव करते हैं। [1]

जहाँ गिरिराज बाबा को बेझर (चना/बेसन मिश्रित अनाज) की रोटी और उसके ऊपर टेंटी (करील का फल) की शाक का भोग धराया जाता है। गोस्वामी श्री हरिराय जी कहते हैं कि महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी के चरणों का आश्रय समस्त दुःखों का पूर्णतः नाश कर देता है। [2]