प्यारी पग नूपुर मधुर, धुनि सुनिवे के हेत।
मनहुँ करन पिय के बसे, चरन सरन सुख देत॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली
श्री राधा के चरणों में सुशोभित नूपुरों की मधुर ध्वनि इतनी मनोहर है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो श्रीकृष्ण के कान उसी ध्वनि को सुनने के लिए उनके चरणों में आकर बस गए हैं। श्री राधा के चरण परम सुख प्रदान करते हैं।
मनहुँ करन पिय के बसे, चरन सरन सुख देत॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली
श्री राधा के चरणों में सुशोभित नूपुरों की मधुर ध्वनि इतनी मनोहर है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो श्रीकृष्ण के कान उसी ध्वनि को सुनने के लिए उनके चरणों में आकर बस गए हैं। श्री राधा के चरण परम सुख प्रदान करते हैं।

