श्री वृन्दावन छांडिकै, जो कहू अनत हि जाउं।
दामोदर जनमति कहौ, और कहियौ नाउ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (18)
यदि मैं श्री वृंदावन धाम को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर चला जाऊँ, तो मैं दृढ़तापूर्वक घोषित करता हूँ कि तुम मुझे इस अनन्य निष्ठा से भटका हुआ पतित समझकर दामोदर नाम से कदापि न पुकारना अर्थात् मेरा अस्तित्व, पहचान और जीवन सब कुछ श्री वृन्दावन से ही जुड़ा हुआ है।
दामोदर जनमति कहौ, और कहियौ नाउ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (18)
यदि मैं श्री वृंदावन धाम को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर चला जाऊँ, तो मैं दृढ़तापूर्वक घोषित करता हूँ कि तुम मुझे इस अनन्य निष्ठा से भटका हुआ पतित समझकर दामोदर नाम से कदापि न पुकारना अर्थात् मेरा अस्तित्व, पहचान और जीवन सब कुछ श्री वृन्दावन से ही जुड़ा हुआ है।

