मुरली मधुर बजाय के हँसत - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (03)

मुरली मधुर बजाय के हँसत - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (03)

मुरली मधुर बजाय के, हँसत जबहिं घनश्याम।
जानि परै घन बीच जनु, दमकि रही घनबाम॥

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (03)

जब घनश्याम (श्री कृष्ण) अपनी मुरली की मधुर तान छेड़कर मंद-मंद मुस्कुराते हैं, तब उनकी वह मुस्कान ऐसी प्रतीत होती है मानो गहरे नीले बादलों (श्याम शरीर) के बीच बिजली (दमक) चमक रही हो।