(राग जैजैवंती)
बहुत दिवस देखे बिन बीते, ललितलडैती दरसन दीजे।
जौन चूक लखि भईं अनमनी, सो अपराध छिमा अब कीजे॥ [1]
कोमलकंज चरन नखशोभा, जीवन दृगन विलोकन वीजे।
ललितकिशोरी विरहवियाकुल, पथिक प्रान हाहा रख लीजे॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (86)
हे ललित लाड़ैती श्री राधे! आपके दर्शन किए बिना बहुत दिन बीत गए हैं। यदि मुझसे कोई भूल हो गई हो और उसी के कारण आप मुझसे विमुख अथवा उदास हो गई हों, तो कृपापूर्वक उस अपराध को अब क्षमा कर दीजिए और मुझे अपने दर्शन प्रदान कीजिए। [1]
अपने कोमल चरण-कमलों के नखों की दिव्य शोभा का दर्शन कराकर मेरे नेत्रों को जीवनदान दीजिए। हे ललित किशोरी! मैं आपके विरह से अत्यन्त व्याकुल होकर प्राणहीन-सा हो गया हूँ; कृपाकर मेरे इन व्याकुल प्राणों की रक्षा कीजिए। [2]
बहुत दिवस देखे बिन बीते, ललितलडैती दरसन दीजे।
जौन चूक लखि भईं अनमनी, सो अपराध छिमा अब कीजे॥ [1]
कोमलकंज चरन नखशोभा, जीवन दृगन विलोकन वीजे।
ललितकिशोरी विरहवियाकुल, पथिक प्रान हाहा रख लीजे॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (86)
हे ललित लाड़ैती श्री राधे! आपके दर्शन किए बिना बहुत दिन बीत गए हैं। यदि मुझसे कोई भूल हो गई हो और उसी के कारण आप मुझसे विमुख अथवा उदास हो गई हों, तो कृपापूर्वक उस अपराध को अब क्षमा कर दीजिए और मुझे अपने दर्शन प्रदान कीजिए। [1]
अपने कोमल चरण-कमलों के नखों की दिव्य शोभा का दर्शन कराकर मेरे नेत्रों को जीवनदान दीजिए। हे ललित किशोरी! मैं आपके विरह से अत्यन्त व्याकुल होकर प्राणहीन-सा हो गया हूँ; कृपाकर मेरे इन व्याकुल प्राणों की रक्षा कीजिए। [2]

