धन-धन वृन्दावन के लवा बटेर - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (72)

धन-धन वृन्दावन के लवा बटेर - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (72)

धन-धन वृन्दावन के लवा बटेर प्यारे।
चार पहर दुबके ही बैठें, कुही बाज के मारे॥ [1]
रज में रहें पियें जमुना जल, वन में बसै अन्यारे।
अभयराम ऐहूँ बड़भागी, ये लाला के प्यारे॥ [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (72)

धन्य हैं श्री वृन्दावन के लवा और बटेर पक्षी। बाज के भय से वे दिन-रात कुंजों की ओट के भीतर दुबकेहुए बैठे रहते हैं, फिर भी कभी वृन्दावन छोड़कर बाहर नहीं जाते और सदा कुंजों की शरण लिए रहते हैं। [1]

वे वृन्दावन की परम-पावन रज में ही रहते हैं, यमुना जी का जल पीते हैं और वृन्दावन के वनों में ही अपना जीवन बिताते हैं। श्री अभयराम जी कहते हैं कि ये पक्षी अत्यन्त भाग्यशाली हैं तथा लाड़ली-लाल के परम प्रिय हैं। [2]