वत्सलता अरु अभय सदा आरत-अघ-सोखन - श्री चतुर्भुजदास जी

वत्सलता अरु अभय सदा आरत-अघ-सोखन - श्री चतुर्भुजदास जी

वत्सलता अरु अभय सदा, आरत-अघ-सोखन।
दीनबंधु सुखसिंधु सकल, सुख दै दुख-मोचन॥

- श्री चतुर्भुजदास जी

श्री कृष्ण के गुणों का वर्णन करते हुए श्री चतुर्भुज दास कहते हैं कि वे सदैव वात्सल्य और करुणा से परिपूर्ण रहते हैं तथा अपने शरणागत को निर्भयता प्रदान करते हैं। वे पापों का नाश करने वाले, दीनों के सच्चे मित्र तथा सुख के अथाह सागर हैं। वे समस्त सुखों के दाता हैं और दुःखों का निवारण करने वाले हैं।