जो मन मोहन करत बस, सबहिन कौ चित चोर।
सो या नामहिं प्रीति सौं, जपत रहत निशि भोर॥
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.3)
जो मनमोहन (श्री कृष्ण) संपूर्ण संसार को अपने वश में कर लेते हैं और जो सभी के चित्त को चुराने वाले हैं, वे स्वयं भी इस ‘राधा’ नाम को, अत्यंत प्रेमपूर्वक, रात-दिन निरंतर जपते रहते हैं।
सो या नामहिं प्रीति सौं, जपत रहत निशि भोर॥
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (94.3)
जो मनमोहन (श्री कृष्ण) संपूर्ण संसार को अपने वश में कर लेते हैं और जो सभी के चित्त को चुराने वाले हैं, वे स्वयं भी इस ‘राधा’ नाम को, अत्यंत प्रेमपूर्वक, रात-दिन निरंतर जपते रहते हैं।

