ललिता श्रीहरिदासी के आँगन सुखद - श्री राधाशरण देव

ललिता श्रीहरिदासी के आँगन सुखद - श्री राधाशरण देव

(सवैया)
ललिता श्रीहरिदासी के आँगन,
सुखद बधाई बाजै हो।
महल ते प्रगटे श्रीवाँकेबिहारी,
रसिकन के सुख काजै हो॥ [1]
सखी सहेली सहचरि गावत,
अति आनन्द समाजै हो।
श्रीराधा सरन छबि निरखत,
बीठल विपुल प्रेम सुख साजै हो॥ [2]

- श्री राधाशरण देव

ललिता सखी के अवतार, स्वामी श्रीहरिदास जी के आँगन अर्थात् श्री निधिवन राज में आनन्द की वर्षा करती हुई, मंगलमयी बधाइयाँ बज रही हैं। आज बाँकेबिहारी जी रसिकों को सुख प्रदान करने हेतु नित्यनिकुंज मंदिर से इस धराधाम पर प्रकट हुए हैं। [1]

सखियाँ और सहचरियाँ हर्षपूर्वक मंगल-गीत गा रही हैं तथा समस्त समाज प्रेम और आनन्द में मग्न है। अपने अनन्य शिष्य श्रीबीठलविपुल जी की प्रेमभरी प्रार्थना पर स्वामी हरिदासजी महाराज की कृपा से यह जो परम आनंद का साज आज सजा है, उसकी शोभा को श्रीराधाशरणजी मुग्ध होकर निहार रहे हैं। [2]