सखी सुनु बरषैगो रस-मेह राधाकृष्ण - श्री संकेत अली, संकेत लता, विवाह प्रकर्ण(1)

सखी सुनु बरषैगो रस-मेह राधाकृष्ण - श्री संकेत अली, संकेत लता, विवाह प्रकर्ण(1)

सखी सुनु बरषैगो रस-मेह।
राधाकृष्ण विवाह होयगौ, सुनि आई उन गेह॥ [1]
आनन्द बेलि फलेगी उर में, लगि के अंकुर नेह।
‘अलि संकेत’ लहैंगे दृग फल, नव छवि निरखत येह॥ [2]

- श्री संकेत अली, संकेत लता, विवाह प्रकर्ण (1)

हे सखी! सुनो, अब प्रेम-रस की वर्षा होने वाली है। मैं अभी उनके घर से यह बात सुनकर आई हूँ कि हमारे प्यारे श्री राधा-कृष्ण का परस्पर मंगलमय विवाह होने वाला है। [1]

इस दिव्य उत्सव के दर्शन से हृदय में प्रेमरूपी अंकुर फूटेंगे और आनन्दरूपी लता फलवती हो जाएगी। श्री संकेत अलि कहते हैं कि इस नित्य नवीन और मनोहर छवि का दर्शन करके मेरे नेत्र अपने जीवन का परम फल प्राप्त करेंगे। [2]