देह धरेका फल यही, भज मन कृष्णमुरार।
मनुष जनमकी मौज यह, मिलै न बारम्बार॥
- श्री कबीरदास
हे मन! इस मानव देह को धारण करने का वास्तविक फल केवल यही है कि तू निरंतर श्रीकृष्ण मुरारि का भजन कर। मनुष्य-जन्म का वास्तविक आनंद भगवद्भजन में ही है, क्योंकि यह दुर्लभ अवसर बार-बार प्राप्त नहीं होता।
मनुष जनमकी मौज यह, मिलै न बारम्बार॥
- श्री कबीरदास
हे मन! इस मानव देह को धारण करने का वास्तविक फल केवल यही है कि तू निरंतर श्रीकृष्ण मुरारि का भजन कर। मनुष्य-जन्म का वास्तविक आनंद भगवद्भजन में ही है, क्योंकि यह दुर्लभ अवसर बार-बार प्राप्त नहीं होता।

