श्यामा प्यारी सखियन की सरदार - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेन्दु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (85)

श्यामा प्यारी सखियन की सरदार - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेन्दु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (85)

श्यामा प्यारी सखियन की सरदार।
अति भोरी गोरी रस-बोरी, सहजहि परम उदार॥ [1]
लाज-कृपा सों भरे बड़े दृग, बड़े छूटे तिमि धार।
'हरीचंद' तनिकहिं बस कीनो, श्री ब्रजराज-कुमार॥ [2]

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेन्दु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (85)

श्री श्यामा जू समस्त सखियों की स्वामिनी एवं सरदार हैं। वे अत्यन्त भोली, गौरवर्णा, मन को मोह लेने वाली तथा स्वभाव से ही परम उदार हैं। [1]

उनके विशाल नेत्र लज्जा और करुणा से परिपूर्ण हैं जिसमें से प्रेम-रस की उज्जवल धाराएँ बहती हैं। श्री हरीचंद कहते हैं कि श्यामप्यारी जू ने तो अपनी एक छोटी-सी कटाक्ष से ही ब्रजराजकुमार श्रीकृष्ण को पूर्णतः अपने प्रेम के वश में कर लिया है। [2]