‘रा’ अक्षर को सुनत ही - ब्रज के दोहे

‘रा’ अक्षर को सुनत ही - ब्रज के दोहे

‘रा’ अक्षर को सुनत ही, मेरो मन ललचाये।
मन क्रम वचन प्राण धन, नम्र सखी बलि जाय॥

- श्री नम्र सखी

'रा' अक्षर को सुनते ही मेरा मन प्रेम-विह्वल होकर लालायित हो उठता है। नम्र सखी उस परम पावन "राधा" नाम पर अपना तन, मन, कर्म, वचन, प्राण तथा सर्वस्व न्यौछावर करती हूँ।