राधाधीनः सदा ब्रूते पश्यत्यथ शृणोति च।
राधाधीनश्च हसति गायत्यपि च नृत्यति॥
- श्री वागीश शास्त्री जी, श्रीराधासप्तशती (1.44)
श्री कृष्ण सदा श्रीराधा के अधीन होकर ही बोलते, देखते और सुनते हैं। श्रीराधा के अधीन होकर ही हँसते, गाते और नाचते हैं अर्थात् उनकी प्रत्येक क्रिया श्री राधा के वशीभूत ही है।
राधाधीनश्च हसति गायत्यपि च नृत्यति॥
- श्री वागीश शास्त्री जी, श्रीराधासप्तशती (1.44)
श्री कृष्ण सदा श्रीराधा के अधीन होकर ही बोलते, देखते और सुनते हैं। श्रीराधा के अधीन होकर ही हँसते, गाते और नाचते हैं अर्थात् उनकी प्रत्येक क्रिया श्री राधा के वशीभूत ही है।

