छिन-छिन हैं नव लाड़ली, करिये रास विनोद।
नव-नव प्रीति विमल वर, भरी रहो रस मोद॥
- श्री हित गोपाल दास, निकुंज रस वल्लरी, आशीष दोहा
हमारी परम सुकोमल लाड़ली जी (श्री राधा) क्षण-प्रति-क्षण नित्य-नूतन सौंदर्य से सुशोभित होती रहती हैं, जो रसिक शिरोमणि श्यामसुंदर के संग नित्य-निरंतर रास-विनोद रचाती हैं। यह प्रार्थना है कि आप दोनों का निर्मल और श्रेष्ठ प्रेम सर्वदा नित्य-नवीन भाव से वृद्धिगत होता रहे, तथा आपका यह नित्य-विहार सदा अगाध रस और परम आनंद (मोद) से लबालब भरा रहे।
नव-नव प्रीति विमल वर, भरी रहो रस मोद॥
- श्री हित गोपाल दास, निकुंज रस वल्लरी, आशीष दोहा
हमारी परम सुकोमल लाड़ली जी (श्री राधा) क्षण-प्रति-क्षण नित्य-नूतन सौंदर्य से सुशोभित होती रहती हैं, जो रसिक शिरोमणि श्यामसुंदर के संग नित्य-निरंतर रास-विनोद रचाती हैं। यह प्रार्थना है कि आप दोनों का निर्मल और श्रेष्ठ प्रेम सर्वदा नित्य-नवीन भाव से वृद्धिगत होता रहे, तथा आपका यह नित्य-विहार सदा अगाध रस और परम आनंद (मोद) से लबालब भरा रहे।

