पर्यो जगत भव-कूप में, पर्यो मूढ़ प्रज्ञान।
काढ्यौ निज भुज कुंवरि कर, राख्यौ वन सरन आन॥
- श्री अलबेली अलि
मैं परम अज्ञानतावश संसार-रूपी गहरे भव-कूप में गिरा पड़ा था। परंतु मेरी परम कृपालु श्रीराधा जू ने अपनी करुणामयी भुजाओं से मुझे वहाँ से निकालकर, अपने निज धाम श्रीवृन्दावन की शीतल शरण में पहुँचा दिया।
काढ्यौ निज भुज कुंवरि कर, राख्यौ वन सरन आन॥
- श्री अलबेली अलि
मैं परम अज्ञानतावश संसार-रूपी गहरे भव-कूप में गिरा पड़ा था। परंतु मेरी परम कृपालु श्रीराधा जू ने अपनी करुणामयी भुजाओं से मुझे वहाँ से निकालकर, अपने निज धाम श्रीवृन्दावन की शीतल शरण में पहुँचा दिया।

