(राग विहाग)
प्यारी जू सहज सुहाग तिहारौ।
अविचल रहो पिया सँग यह सुख, जीवन प्रान हमारौ॥ [1]
विलसत विहँस विलास परस्पर, रहौ निरन्तर प्यारौ।
मदन 'मोहनमन' मोहिनी श्यामा, कृपा सुदृष्टि निहारौ॥ [2]
- श्री मनमोहन दास जी (शुक संप्रदाय के भक्त)
हे प्यारी जू! आपका सुहाग स्वाभाविक रूप से सहज एवं नित्य है। अपने प्रियतम के साथ आपका यह सुखद मिलन सदा अविचल बना रहे, यही सुख हमारे प्राणों और जीवन का एकमात्र आधार है। [1]
आप दोनों परस्पर हँसते-मुस्कुराते हुए निरंतर दिव्य विलास में मग्न रहें और आपका यह आपसी प्रेम सदा बना रहे। कामदेव को भी मोहित करने वाले मदनमोहन के मन को लुभाने वाली हे मोहिनी श्यामा जू! आप हम पर अपनी कृपामयी सुंदर दृष्टि डालिए। [2]
प्यारी जू सहज सुहाग तिहारौ।
अविचल रहो पिया सँग यह सुख, जीवन प्रान हमारौ॥ [1]
विलसत विहँस विलास परस्पर, रहौ निरन्तर प्यारौ।
मदन 'मोहनमन' मोहिनी श्यामा, कृपा सुदृष्टि निहारौ॥ [2]
- श्री मनमोहन दास जी (शुक संप्रदाय के भक्त)
हे प्यारी जू! आपका सुहाग स्वाभाविक रूप से सहज एवं नित्य है। अपने प्रियतम के साथ आपका यह सुखद मिलन सदा अविचल बना रहे, यही सुख हमारे प्राणों और जीवन का एकमात्र आधार है। [1]
आप दोनों परस्पर हँसते-मुस्कुराते हुए निरंतर दिव्य विलास में मग्न रहें और आपका यह आपसी प्रेम सदा बना रहे। कामदेव को भी मोहित करने वाले मदनमोहन के मन को लुभाने वाली हे मोहिनी श्यामा जू! आप हम पर अपनी कृपामयी सुंदर दृष्टि डालिए। [2]

